अरे दोस्तों, मैं आज एक ऐसी फिल्म की समीक्षा करने वाली हूं जो अपने नाम से तो बहुत धमाकेदार लगती है, लेकिन असल में ये एक बड़ी निराशा है। हां, मैं बात कर रही हूं ‘Bloody Ishq‘ की। चलो, बिना किसी देरी के, शुरू करते हैं इस फिल्म की पोल खोलना।
कहानी की बात
फिल्म की कहानी एक अमीर लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है जिसकी याददाश्त खो गई है। वो अपने कथित पति के साथ स्कॉटलैंड के एक खूबसूरत लेकिन डरावने आइलैंड पर रहती है। कहानी में भूत, रहस्य और धोखे का मिश्रण है, लेकिन इसे देखने के बाद आपको लगेगा कि ये सब आपने पहले भी कहीं देखा है। पूरी फिल्म पुराने फॉर्मूले पर ही टिकी है, और कुछ नया नहीं दिखाया गया।
कहानी की बात
फिल्म की कहानी एक अमीर लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है जिसकी याददाश्त खो गई है। वो अपने कथित पति के साथ स्कॉटलैंड के एक खूबसूरत लेकिन डरावने आइलैंड पर रहती है। कहानी में भूत, रहस्य और धोखे का मिश्रण है, लेकिन इसे देखने के बाद आपको लगेगा कि ये सब आपने पहले भी कहीं देखा है। पूरी फिल्म पुराने फॉर्मूले पर ही टिकी है, और कुछ नया नहीं दिखाया गया।
अभिनय का हाल
अब बात करें अभिनय की। अविका गौर और वरदान पुरी ने अपने किरदारों को निभाने की कोशिश तो की है, लेकिन दोनों की केमिस्ट्री बिल्कुल भी प्रभावी नहीं है। अविका की मासूमियत और डर का एक्टिंग करते समय उनकी कोशिश साफ दिखती है, लेकिन वो दर्शकों को बांध नहीं पातीं। वरदान पुरी का किरदार भी बहुत ही सतही और बिना गहराई के दिखाया गया है।
निर्देशन और कहानी
विक्रम भट्ट का नाम सुनते ही हम उम्मीद करते हैं कि कुछ नया और डरावना देखने को मिलेगा, लेकिन ‘ब्लडी इश्क’ में ऐसा कुछ भी नहीं है। कहानी के ट्विस्ट और टर्न्स इतने पुराने और घिसे-पिटे हैं कि आप पहले ही अंदाजा लगा लेते हैं कि आगे क्या होने वाला है। भट्ट साहब का निर्देशन इस बार बहुत ही कमजोर साबित हुआ है।
सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन डिज़ाइन
सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन डिज़ाइन की बात करें तो, स्कॉटलैंड का आइलैंड और उसके सुंदर नजारे दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन वो भूतिया माहौल कहीं से भी वास्तविक नहीं लगता। प्रोडक्शन डिज़ाइन में भी कुछ नया नहीं है, वही पुराने सेट्स और डरावनी जगहें।
स्पेशल इफेक्ट्स और एडिटिंग | Bloody Ishq Movie review
अब स्पेशल इफेक्ट्स की बात करें तो, भाईसाब, ये तो सबसे बड़ी निराशा है। VFX इतना नकली और बचकाना है कि आपको लगेगा कि आप किसी कार्टून शो देख रहे हैं। एडिटिंग भी बहुत ही स्लो और बोरिंग है। कहानी को बहुत ही खींचा गया है, जिसे छोटा किया जा सकता था।

म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर
म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर की बात करें तो, यहां भी फिल्म बहुत कमजोर साबित होती है। गाने और बैकग्राउंड स्कोर बिल्कुल भी यादगार नहीं हैं। विक्रम भट्ट की फिल्मों का म्यूजिक हमेशा से आइकॉनिक होता है, लेकिन इस बार वो जादू गायब था। कानों में बजने वाला शोर और बेमतलब के गाने फिल्म की और भी बर्बादी करते हैं।
संवाद और पेसिंग
संवादों की बात करें तो, कुछ डायलॉग्स इतने बेमतलब और बचकाने हैं कि आपको हंसी आ जाएगी। पेसिंग भी बहुत ही स्लो है, कुछ सीन्स को और छोटा किया जा सकता था। फिल्म की लंबाई आपको बोर करने के लिए काफी है।
मेरी राय और व्यक्तिगत प्रतिक्रिया
अब बात करते हैं मेरी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया की। ‘ब्लडी इश्क’ ने मुझे बहुत ही निराश किया। अविका गौर और वरदान पुरी की एक्टिंग के बावजूद, फिल्म कहीं भी पकड़ नहीं बना पाई। VFX और म्यूजिक ने फिल्म को और भी बर्बाद कर दिया। कहानी में कुछ भी नया और अनोखा नहीं था, सब कुछ पुराने और घिसे-पिटे फॉर्मूले पर ही आधारित था।
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ताकत और कमजोरियाँ
ताकतें:
- कुछ भी नहीं
कमजोरियाँ:
- नकली VFX
- कमजोर म्यूजिक
- स्लो पेसिंग
- घिसी-पिटी कहानी
- बेमतलब के संवाद
निष्कर्ष | Bloody Ishq Movie review
तो दोस्तों, ‘ब्लडी इश्क’ एक बार देखने लायक भी नहीं है, क्योंकि इसमें कुछ भी नया और दिलचस्प नहीं है। विक्रम भट्ट के फैंस भी इससे निराश हो जाएंगे। अगर आप अपना समय और पैसा बर्बाद नहीं करना चाहते, तो इस फिल्म से दूर ही रहें।
अगर आपको मेरी यह समीक्षा पसंद आई हो या आपके मन में कोई सवाल हो, तो मुझे जरूर बताएं। अगले रिव्यू में फिर मिलेंगे। तब तक के लिए, बाय बाय और ध्यान रखें!


