Director: Aditya Sarpotdar
Writers: Avinash Dwivedi, Chirag Garg, Stars
Stars: Riteish Deshmukh, Sonakshi Sinha, Saqib Saleem
Rating: ★★☆☆☆(2/5)
आज मैं आपके लिए एक ताज़ा-तरीन रिव्यू लेकर आई हूँ फिल्म “KAKUDA” का, जिसे डायरेक्ट किया है Aditya Sarpotdar ने। हाँ, आपने सही सुना! आइए, बिना देरी किए चलते हैं इस रोमांचक और हास्य से भरी हॉरर-कॉमेडी फिल्म की गहराई में।

फिल्म का सारांश:
“KAKUDA” एक छोटे से गाँव की कहानी है जहाँ हर घर में दो दरवाजे होते हैं, एक बड़ा और एक छोटा। और हर मंगलवार शाम 7:01 मिनट में वो छोटा दरवाजा खोलना अनिवार्य होता है। क्यों? यही तो फिल्म का रहस्य है! फिल्म की कहानी में कुछ युवा गाँव आते हैं और इस विचित्र रिवाज के पीछे की सच्चाई जानने की कोशिश करते हैं।
व्यक्तिगत अनुभव:
फिल्म ने मुझे हँसाया, डराया और कहीं न कहीं सोचने पर भी मजबूर कर दिया। हालांकि, कहानी में कई ऐसे पल थे जब मुझे लगा कि “ये क्या हो रहा है?” लेकिन फिर भी, फिल्म ने अपने दिलचस्प ट्विस्ट और टर्न्स से मुझे बांधे रखा।
ताकत और कमजोरियाँ:
अब बात करें फिल्म की ताकत और कमजोरियों की:
ताकत:
- अदाकारी: रितेश देशमुख ने अपने नए अवतार में शानदार अभिनय किया है। उनकी कॉमिक टाइमिंग जबरदस्त है।
- कॉमेडी और हॉरर का मिश्रण: फिल्म में कई ऐसे पल हैं जो आपको हँसाते-हँसाते डराएंगे।
कमजोरियाँ:
- प्लॉट: कहानी कुछ जगहों पर कमजोर लगती है और कई सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं।
- सिनेमैटोग्राफी: कुछ दृश्य ज्यादा प्रभावशाली नहीं थे, जो फिल्म के डरावने पहलू को कमजोर बनाते हैं।
- सपोर्टिंग कास्ट: कुछ किरदारों का विकास सही ढंग से नहीं हुआ है, जिससे उनकी भूमिका अधूरी लगती है।
रोचक तथ्य:
क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म के कुछ दृश्य वास्तविक गाँव में शूट किए गए हैं, जहाँ हर घर में सच में दो दरवाजे होते हैं? ये फिल्म एक लोककथा पर आधारित है, जिससे फिल्म को एक असली और दिलचस्प मोड़ मिलता है।
व्यापक कवरेज:
प्लॉट: कहानी की बुनियाद बहुत मजबूत है, लेकिन उसे सही से गढ़ा नहीं गया। कुछ मोड़ अनुमानित थे, जो फिल्म का मज़ा थोड़ा कम कर देते हैं।
अदाकारी: रितेश देशमुख और सोनाक्षी सिन्हा की जोड़ी ने अच्छा काम किया है। दोनों ने अपने किरदारों को जीवंत बना दिया है।
डायरेक्शन: Aditya Sarpotdar का निर्देशन अनोखा है, लेकिन इस शैली में उनकी पकड़ थोड़ी ढीली दिखती है।
स्कोर और साउंडट्रैक: म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर कहानी के साथ न्याय करता है और माहौल को बढ़िया बनाता है।
सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन डिज़ाइन: कुछ दृश्यों की सिनेमैटोग्राफी बेहतरीन है, लेकिन कुल मिलाकर यह और भी बेहतर हो सकती थी।
स्पेशल इफेक्ट्स और एडिटिंग: स्पेशल इफेक्ट्स अच्छे हैं, लेकिन एडिटिंग कुछ जगहों पर कमजोर लगती है, जिससे फिल्म की गति धीमी हो जाती है।
निष्कर्ष:
“KAKUDA” एक मनोरंजक फिल्म है जो आपको हँसाने और डराने में सफल होती है। हालांकि, कहानी में कुछ खामियाँ हैं, लेकिन रितेश देशमुख और सोनाक्षी सिन्हा के अभिनय ने इसे देखने लायक बना दिया है।
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आखिर में:
अगर आप हॉरर-कॉमेडी के फैन हैं और कुछ नया देखना चाहते हैं, तो “KAKUDA” आपको निराश नहीं करेगी। लेकिन हाँ, अपना दिल और दिमाग बंद करके देखना, तब जाकर यह फिल्म आपको देखने में मजा आएगा।
तो दोस्तों, क्या आप “KAKUDA” देखने का प्लान बना रहे हैं? अपने विचार और प्रतिक्रियाएँ ज़रूर बताइएगा। अगली बार फिर मिलेंगे एक नई फिल्म के रिव्यू के साथ।
ध्यान रखें, फिल्मों के बिना जिंदगी अधूरी है!


