अरे वाह! “उलझ” देख के आई हूं और सच बताऊं तो मैं खुद ही उलझ गई हूं। ये फिल्म रोमांचक तो है, लेकिन उतनी नहीं जितनी उम्मीद थी। तो चलो, चाय और पकोड़े लेकर बैठो और सुनो मेरी रिव्यू इस फिल्म की, क्योंकि ये कहानी एकदम उलझा देने वाली है!
Director: Sudhanshu Saria
Writers: Parveez Sheikh, Sudhanshu Saria, Atika Chohan
Stars: Janhvi Kapoor, Gulshan Devaiah, Roshan Mathew, Meiyang Chang
Ratings: 2/5 stars

फिल्म की कहानी | Ulajh Movie Review
फिल्म की कहानी है सुहाना भाटिया (जानवी कपूर) की, जो इंडियन एम्बेसी में काम करती है। उसे अचानक लंदन में डेप्युटी हाई कमिश्नर का पद मिल जाता है। उसका परिवार खुश है, पर पिता (आदिल हुसैन) थोड़े चिंतित हैं क्योंकि यह पोस्ट इतनी आसानी से नहीं मिलती। लंदन में सुहाना का सामना होता है जैकब तामांग (मयंक चंग) और सेबिन जोसेफकुट्टी (रोशन मैथ्यू) से, जो उसे पसंद नहीं करते। और फिर आती है कहानी में ट्विस्ट, जब नकुल (गुलशन देवैया) उसे ब्लैकमेल करने लगता है। क्या करेगी सुहाना? देश को बचाएगी या अपने परिवार की इज्जत?
थीम और टोन
फिल्म की थीम है देशभक्ति और व्यक्तिगत संघर्ष। टोन बिल्कुल थ्रिलर वाला है, जिसमें रोमांच और सस्पेंस की भरमार है। हर सीन में कुछ ना कुछ ऐसा होता है जिससे आप अपनी सीट से बंधे रहते हैं।
अभिनय
जानवी कपूर ने सुहाना के किरदार को निभाने की पूरी कोशिश की है, लेकिन कहीं-कहीं वो खुद ही उलझ जाती हैं कि उनका कैरेक्टर किस दिशा में जा रहा है। गुलशन देवैया ने नकुल के रोल में जान डाल दी है। उनकी एक्टिंग देखकर ऐसा लगा जैसे वो किरदार नहीं, बल्कि असल में वही हैं। मयंक चंग को ज्यादा स्क्रीन टाइम मिलना चाहिए था, उनका रोल थोड़ा वेस्टेड लगा।
निर्देशन
निर्देशक ने फिल्म को संभालने की कोशिश की है, लेकिन कुछ सीन इतने धीमे हैं कि बोरियत होने लगती है। इंटरवल के बाद चीज़ें तेजी से आगे बढ़ती हैं और सस्पेंस का मजा आता है, लेकिन फर्स्ट हाफ काफी स्लो है।
स्कोर और सिनेमैटोग्राफी
म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म का मजबूत पक्ष है। हर सीन के साथ म्यूजिक ने माहौल को और भी रोमांचक बना दिया है। सिनेमैटोग्राफी भी बेहतरीन है। लंदन की लोकेशंस और खूबसूरत शॉट्स ने आँखों को ठंडक दी है।
प्रोडक्शन डिज़ाइन और स्पेशल इफेक्ट्स
प्रोडक्शन डिज़ाइन और सेट्स भी रियलिस्टिक और अच्छे थे। स्पेशल इफेक्ट्स का ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया गया है, लेकिन जहां भी किया गया है, वहां वो शानदार दिखते हैं।
एडिटिंग और पेसिंग
फिल्म की एडिटिंग ठीक-ठाक है, लेकिन कहीं-कहीं फर्स्ट हाफ में पेसिंग थोड़ी स्लो हो जाती है। लेकिन जैसे ही इंटरवल होता है, फिल्म की गति तेजी से बढ़ती है और सस्पेंस आपको बांधे रखता है।
डायलॉग्स
डायलॉग्स सिंपल और प्रभावी हैं। कुछ डायलॉग्स ऐसे हैं जो दिल को छू जाते हैं और कुछ ऐसे भी हैं जो आपको सोचने पर मजबूर कर देते हैं।
ताकत और कमजोरियां
ताकत:
- गुलशन देवैया की एक्टिंग।
- सस्पेंस और थ्रिलर एलिमेंट्स।
- म्यूजिक और सिनेमैटोग्राफी।
कमजोरियां:
- फर्स्ट हाफ की स्लो पेसिंग।
- जानवी कपूर का कभी-कभी कंफ्यूजिंग परफॉर्मेंस।
- मयंक चंग के किरदार को ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं मिला।
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निष्कर्ष
अगर आप स्पाई थ्रिलर के फैन हैं और थोड़ा इमोशनल ड्रामा भी पसंद करते हैं, तो “उलझ” आपको एक बार देखनी चाहिए। लेकिन अगर आप कुछ नया और अलग देखने की उम्मीद कर रहे हैं, तो शायद ये फिल्म आपको निराश कर सकती है।
रेटिंग
मैं इस फिल्म को दूंगी 2/5 स्टार्स। यह एक औसत कोशिश है और देखी जा सकती है, लेकिन खास उम्मीदें न रखें।
तो यार, अगर तुम्हें थ्रिल का हल्का-फुल्का मजा लेना है और एक औसत कहानी देखनी है, तो “उलझ” देखने जा सकते हो। मिलते हैं अगले रिव्यू में, तब तक के लिए बाय-बाय और एंजॉय करो!


